अग्रवाल कुटुंबनामों का वर्गीकरण - Classification of Agarwal's family Names
अग्रवालों में विभिन्न जाति सूचक नामों और गोत्रो के साथ अन्य सह्रस्रों व्योम, अल्ल, बँक, अटक, शाखा और उपनाम का भी प्रयोग किया किया जाता है। यह कुटुंबनाम अग्रवालों के व्यवसाय, स्थान, वंश, आदि के भेद से उत्पन्न हुए हैं और इनका अपना समग्र और विस्तृत इतिहास है। इस भाग में उन्हीं कारकों के आधार अग्रवालों के विभिन्न कुटुंबनामों का वर्गीकरण, गोत्र, मूलस्थान, अन्य प्रचलित नाम/वर्तनी सती माता आदि विवरण दिया है।
कुटुंबनाम का वर्गीकरण
1. वर्ण/जाति आधारित कुटुंबनाम
वर्ण/जाति आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब अपनी वर्ण अथवा जाति का नाम अपने कुटुंबनाम के लिए प्रयोग करता है।
उदाहरण: गुप्त (अपभ्रंश: गुप्ता), वैश्य, अग्रवाल, (अपभ्रंश : अग्रवाला, अगरवाला) अग्रवंशी, अग्रकुल, अग्रहरि, सेठ, साहू इत्यादि।
2. कुटुंबपुरुष आधारित कुटुंबनाम
अग्रवाल परिवारों में अनेको व्यक्तियों ने अपने वंश में विशेष नाम और ख्याति प्राप्त की, जिससे उन्हीं के नाम से उनका वंश प्रसिद्ध हो गया तथा परिवार के लोग उनका नाम कुटुंबनाम के रूप में प्रयोग करने लगे। कुटुंबपुरुष आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब अपने कुलपुरुष का नाम अपने पारिवारिक नाम की तरह प्रयोग करता है। यहाँ विशेष बात यह है कि जहाँ पूर्वजों के नाम पर कुटुंबनाम चलता है वहाँ उस से सम्बंधित परिवार का गोत्र एक ही होता है।
उदाहरण: कहनानी, तनमुखरामका, राजारामका, संतरामजीका, हिम्मतसिंहका, मानसिंहका, हरलालका, टिकमाणी, भावसिंहका होल्लमल इत्यादि।
3. स्थान आधारित कुटुंबनाम
अनेक अग्रवाल अपने मूल स्थान को छोड़कर अन्यत्र बस गये, किंतु मूल स्थान से संबंध बनाये रखने के लिये, उस स्थान का प्रयोग अपने नाम के साथ करने लगे। स्थान आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब निवास/प्रवास/विस्थापन स्थान के नाम या उसमे कुछ संशोधन कर उसे अपने कुटुंबनाम के लिए प्रयोग करता है। प्राय: स्थान आधारित कुटुंबनाम, व्यक्ति से जुड़े स्थान से सम्बंधित होते हैं। इस तरह के स्थान किसी भी प्रकार की गांव/नगर आदि जहाँ व्यक्ति का घर, खेत कार्य या व्यवसाय हो। कुछ अग्रवालों ने अपने निकास स्थान गाँव अथवा नगर के नाम से अपने कुटुंबनाम रखे हैं।
उदाहरण: कानोडिया, कासलीवाल, केजड़ीवाल, केडिया, गनेरीवाल, गाड़ोदिया, झुनझुनवाला, टीबड़ेवाल, डालमिया, तोदी, हलवासिया, धानुका, जयपुरयिा, हिसारिया, केड, केड़िया इत्यादि।
4. व्यवसाय आधारित कुटुंबनाम
व्यवसाय आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब अपने व्यवसाय का नाम या उसमे कुछ संशोधन कर उसे अपने कुटुंबनाम के लिए प्रयोग करता है। पूर्व काल में जिस कार्य से जिस परिवार को जिस कार्य के लिए प्रसिद्ध था उस परिवार ने उसी व्यवसाय को अपने कुटुंबनाम की तरह प्रयोग करना प्रारम्भ कर दिया।
उदाहरण: पंसारी, पोद्दार, बजाज, लोहिया, सराफ, घीवाला, बाल्टीवाला, कसेरा, कंदोई, जौहरी, कोड़ीवाले इत्यादि।
5. पद आधारित कुटुंबनाम
पद आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब अपने पद का नाम या उसमे कुछ संशोधन कर उसे अपने कुटुंबनाम के लिए प्रयोग करता है।
उदाहरण: कानुनगो, ख़ज़ांची, पोद्दार, पटवारी, सेठ, चौधरी, रत्नाकर, भारतेंदु, नंबरदार इत्यादि।
6. पदवी आधारित कुटुंबनाम
पदवी आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब राजा या प्रश्न से प्राप्त पदवी/सम्मान आदि का नाम या उसमे कुछ संशोधन कर उसे अपने कुटुंबनाम के लिए प्रयोग करता है।
उदाहरण: राय, रईस इत्यादि।
7. आस्था आधारित कुटुंबनाम
आस्था आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब अपनी धार्मिक श्रद्धा के आधार पर अपने इष्ट देव/देवी/धार्मिक गुरु/धार्मिक स्थान के नाम का या उसमे कुछ संशोधन कर उसे अपने कुटुंबनाम के लिए प्रयोग करता है, इस प्रकार के कुटुंबनाम के गोत्र का अनुमान लगाना कठिन है। इस प्रकार के एक से कुटुंबनाम प्राय: कई समुदायों में पाए जाते हैं।
उदाहरण: दादू, जैन, आर्य इत्यादि।
8. प्रथा आधारित कुटुंबनाम
प्रथा आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब किसी विशेष प्रथा के कारण प्रसिद्ध होने पर उसी प्रथा को आधार मान या उसमें कुछ संशोधन कर उसे अपने कुटुंबनाम के लिए प्रयोग करता है, इस प्रकार के एक से कुटुंबनाम प्राय: कई समुदायों में पाए जाते हैं।
उदाहरण: गिंदोड़िया इत्यादि।
9. घटना आधारित कुटुंबनाम
घटना आधारित कुटुंबनाम में कुटुंब किसी विशेष घटना अथवा परिस्थितियों के आधार के कारण प्रसिद्ध होने से, उसी घटना को या उसमे कुछ संशोधन कर उसे अपने कुटुंबनाम के लिए प्रयोग करता है।
उदाहरण: टांटिया, सूगला, चिड़ीपाल, मोर इत्यादि।
10. स्वभाव विशेषता आधारित कुटुंबनाम
स्वभावगत विशेषता के आधार पर कई पारिवारिक नामों का प्रचलन उनके परिवार की स्वभावगत विशेषता के कारण भी हो गया।
उदाहरण: मजाकिया स्वभाव के कारण मसखरा, असम में बनिये को अति चतुर स्वभाव के कारण काईया, भक्ति स्वभाव के कारण भगत इत्यादि।
11. आकृति आधारित कुटुंबनाम
समाज में कुछ पुरुष अपनी कुछ विशेष आकृति/बनावट होने के कारण भी विख्यात हुए, इन कुटुंबनाम का प्रचलन उन पुरुषों की विशेष आकृति के कारण माना गया।
उदहारण: भूत कुटुंबनाम उस कुटुंब में सदस्यों की भूतनुमा आकृति के कारण प्रचलित हुआ।
कुछ कुटुंबनाम का गुणों के आधार पर वर्गीकरण किया गया जैसे - बीसा, दस्सा, पंजा आदि किन्तु समय के साथ उसका कोई औचित्य नहीं रहा है और इस प्रकार के कुटुंबनामों का प्रयोग नगण्य है।
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